*कारगिल सेक्टर में शहीद अमेठी जिले के वीरेन्द्र सिंह को शत शत नमन व श्रृद्धांजलि*
अमेठी
देश के गौरव व सम्मान की रक्षा में समर्पित हमारे देश के सच्चे सपूतों को भला हम कैसे भुला सकते हैं ? जरा याद कीजिए उन हजारों सैनिकों को जो हमारे आन मान व शान के लिए नित्य कैसे दुश्मनों के छक्के छुडाते रहते हैं कि हम आप चैन की नींद सो सकें । परंतु दुर्भाग्यवश इस कठिन सेवा में हमारे कुछ सैनिकों को अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़ जाती है । इन्हीं में से एक थे वीरेंद्र सिंह जो 7 अक्टूबर 2000 को दुश्मनों से लडते लडते कारगिल सेक्टर के द्राक्ष पोस्ट पर शहीद हो गये । ऐसे सपूतों को हमारा  शत शत नमन ! आप को बता दें कि 1978 में अमेठी जिले के दादरा गाँव में जन्मे इस युवा को बचपन से ही फौज में सेवा का शौक था परंतु दुर्भाग्यवश देश की सेवा करते हुए महज  22 वर्ष की उम्र में ही  देश की रक्षा में शहादत स्वीकार कर बैठा । मां ने अपना लाल खो दिया  तो देश ने अपना एक और बहादुर जवान ! देश के खातिर  कितनी औरतें युवा अवस्था में विधवा हो जाती हैं कितनी माताओं को  अपना इकलौता लाल भी खोना पड जाता है आखिर क्यों ? बस यही न कि हमारा और हमारे देश का सिर सदैव गर्व से ऊंचा रहे और हम फक्र से कह सकें कि *यह देश है हमारा* इतिहास गवाह है कि विगत से ही हमारे देश में युद्ध के संसाधनों की चाहे कितनी भी कमी क्यों न रही हो लेकिन हमारे देश के इन वीर सपूतों ने कभी भी हमारा सिर झुकने नही दिया । गलत फहमी में न रहें अगर चीन ने 1962 में अपने देश को धोखा दिया तो हमारे वीर जवानों ने कुछ दिनों बाद ही चीन को नाकों चने चबवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है ।
दुखद तो तब लगता है जब हमारे देश का शासन चलाने वाले कुछ राजनीतिक दल ही हमारे सैनिकों के बलिदान को मौत की संज्ञा देते हैं । मुख्यमंत्री के पद पर आसीन अरविंद केजरीवाल जैसे देश भक्त सर्जिकल स्ट्राइक की सीडी मांगते है ।वामपंथी हो याकि कांग्रेस  परोक्ष या अपरोक्ष रूप में आतंकियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं ।देश भक्ति को चमचागीरी की संज्ञा देते हैं फिर भी हम इन राजनीतिक पार्टियों को देश का मसीहा समझते हैं ।
अभी दो दिन पहले ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी आये थे । बड़ी बड़ी बातें किया परंतु उन्हें अपने ही क्षेत्र के इस शहीद सपूत की याद नही आयी जिसका 7 अक्टूबर को शहीद दिवस है जिसे गाँव मे स्थित प्राइमरी स्कूल के बच्चों को तो याद रहा परंतु माननीय सांसद जी को देश का छ: महीने में विकास को आसमान की ऊँचाइयों तक पहुँचाना तो याद रहा लेकिन देश के लिए शहादत देने वाला जवान नहीं ।

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